Hindi Poem: सुबकता रहा चांद रातभर...


㇐㇣㇐

सुबकता रहा चांद रातभर,
सिसकती रही हवाएं रातभर,
करहाते रहे पहाड़ रातभर,
चीखती रही दिशाएं रातभर.

शायद कोई सपना था.

मगर सुबह मैनें देखा...

शबनम बिखरी हुई थी हर पात पर,
ज़रूर आसमान रोया होगा रातभर.


㇐㇣㇐

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*Image by Lars_Nissen from Pixabay

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